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Monday, December 20, 2010

मुझे मौत चाहिए

जी हाँ मैं एक आम आदमी हूँ और मैं आत्महत्या करना चाहता हूँ ! मैं कई दिनों से विचार कर रहा था ! लगातार सोच रहा था पर किसी निश्चय पर नहीं पहुँच पा रहा था ! किसी से कह भी नहीं पा रहा था ! कई दोस्तों से बात की सबने बात को हंसी में उड़ा दिया ! किसी ने कोई ठोस राय नहीं दी ! मैं असमंजस में था ! कोई मदद भी करने को तैयार नहीं था ! मदद बाद की बात किसी के पास मेरी बात सुनने का समय भी नहीं था ! कोई समय निकाल ही नहीं पा रहा था ! टेलीविजन से कोई नया रास्ता पाने की फिराक में टीवी चालु करके देखा और कई दिन देखा पर वो बेचारे बहुत व्यस्त थे ! सभी चेनल या तो सलमान और कटरीना की फ़िक्र में  थे जो बचे हुए थे वो या तो सास बहु सीरियल की कहानी सुनाने में  लगे थे या फिर कांग्रेस पार्टी के महाधिवेशन की कुर्सियां दिखाने में मसरूफ थे ! मेरी आत्महत्या से किसी को कुछ नहीं लेना था ! लेना भी क्यूँ हो ? मैं एक आम आदमी जो ठहरा ! मेरी औकात ही क्या है !
           मैं लाचार हो चुका हूँ ! कम से कम आप लोगों को मेरी आत्महत्या के विषय पर सोचना होगा और अगर सब नहीं तो शायद कोई तो ऐसा होगा जो मुझे किसी तरह की राय देगा ! चाहे हंसी में देगा पर देगा ऐसा मेरा भरोसा है ! मैने बड़े बड़े नेताओं को जनता की अदालत की बात करते देखा है  ! जब भी कोई बात होती है तो सभी नेताओं ,चेनल सभी को कहते सुना है की जनता इस बात का फैसला करेगी ! मुझे भी अब लगता है की जनता ही मेरा फैसला करेगी ! कितनी अच्छी बात होगी ? एक आम आदमी का फैसला बहुत सारे आम आदमी करेंगे !
          मेरी व्यथा ये है की मैं अपने परिवार के आगे शर्मिंदा हूँ ! अपने परिवार से आँखें नहीं मिला पाता !मैं एक साधारण नौकरी करता हूँ ! 60 रूपये किलो का प्याज और चालीस रूपये किलो का टमाटर मैं अपने परिवार को नहीं खिला सकता ! सौ रूपये वाली दाल एक बार खरीद लेने के बाद दुबारा पंसारी से आँख मिलाने की हिम्मत नहीं होती ! तीस रूपये किलो का दूध खरीदने के बाद दूध वाला जब अगले महीने दाम बढ़ाने की जब बात करता है तो वो  ग्वाला दिखने की बजाय प्रणब मुखर्जी ज्यादा लगता  है ! आज जब सुना की रसोई गैस की कीमत में फिर बढ़ोतरी की आशंका है तो परिवार खाना खाने की बजाय इस बात पर विचार विमर्श करने लगा की जो गैस सिलंडर एक महिना चलता था  को और ज्यादा कैसे चलाया जाए ! पहले जब जेब में पैसे नहीं होते थे तो घर में  झूठा गुस्सा दिखा कर काम चल जाता था क्यूंकि गुस्सा देख कर घरवाली पैसे मांगने या किसी चीज की मांग करने की हिम्मत नहीं करेगी ! पर अब ये तरीका भी बेकार हो चला है क्यूंकि झूठी राजनीति से देश तो चल जाता है लेकिन घर नहीं ! सो इस झूठे गुस्से की पोल भी खुल चुकी है !
   
      खैर सच्चाई ये है की मैं हार चुका हूँ कभी कभी खुद अपने दिल में सोचता हूँ की भगवान् ने मुझे क्यों इस धरती पर भेजा अगर भेजा तो इतना गरीब बना कर क्यों भेजा ? क्या आम आदमी होना मेरे लिए इतना बड़ा श्राप है ! क्यूँ भगवान् जिनके पास है उन्ही को  और दिए जा रहा है ? अगर भगवन दे भी रहा है तो दे दे मुझे कोई परेशानी नहीं ....परेशानी ये है की वही भगवान् मुझे अपने गुजारे लायक भी क्यूँ नहीं दे रहा ? क्यूँ मुझे अकेले में रोना पड़ता है ? क्यूँ भगवान् ने मेरे जैसे आदमी को सिर्फ चिंता कमाने के लिए रख छोड़ा है ? मुझे नहीं चाहिए बड़ा बंगला नहीं चाहिए बड़ी गाडी नहीं चाहिए नौकरों की लम्बी फ़ौज पर अपने और अपने परिवार के गुजारे के लिए तो पूरा चाहिए !

सो अब फैसला किया है की मुझे मरना चाहिए ! क्यूंकि भगवान् से जीते जी तो बात नहीं हो सकती शायद मरने के बाद उसके संसार में जाकर दो चार सवाल पूछ पाऊँ और अपने जैसे न जाने कितने आम आदमी जो दुःख झेल रहे हैं शायद उनके बारे में भगवान् को सब बता सकूँ क्यूंकि लगता है इन पैसे वालों ने कहीं भगवान् के संदेशवाहक को तो नहीं खरीद लिया जो हम जैसे लोगो की पुकार  भगवान् तक नहीं पहुँचने दे रहे हों ! मैंने सुना है भगवान् सब देखता है  तो मुझे भी उम्मीद यही है मेरा ये लेख भी भगवान् देखेगा और कुछ न कुछ जरूर करेगा ! शायद भगवान् इसी लेख को विनती मान कुछ पिघल जाए ! .......तब तक आप लोगों से विनती है की मेरे इस लेख को मेरा निजी लेख मान कर अपनी राय या प्रतिक्रिया जरूर दें की मुझे किस तरह मरना चाहिए शायद आपके बताये रास्ते से मैं अपने मन पक्का कर अपनी मौत के फैसले को और मजबूत कर सकूँ और अपने मौत के विचार को और मजबूत कर लूँ !


आपकी सलाह और मार्गदर्शन की मुझे पूरी आस है आशा है आप अपने मार्गदर्शन से मेरे फैसले को और मजबूत करेंगे!    
आप लोगों से विनती है की ब्लॉग के किसी लेख पर अपनी
राय दें या न दें पर इस विषय पर प्रतिक्रिया जरूर दें
....आपका मित्र   समीर चतुर्वेदी  

1 comment:

  1. Respected Sir,
    With this blog U write "mere maan ki Baat".
    This is the condition of mine, which I told U on phone. But Sir, as U told me that believe in GOD. from that day I do all remedies. Now I think positive.
    Thanks sir.

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